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विकासखंड - नैनपुर, ज़िला - मंडला (मध्य प्रदेश)

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2020

मानव प्रजनन तंत्र (Human Reproductive System )

 

मानव प्रजनन तंत्र Human Reproductive System

जिस प्रक्रम द्वारा जीव अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं, उसे प्रजनन (Reproduction) कहते हैं। प्रजनन जीवों का सर्वप्रमुख लक्षण है। इस पृथ्वी पर जीव-जातियों की सततता प्रजनन के फलस्वरूप ही संभव हो पायी है। इस प्रकार प्रजनन वह प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपनी ही जैसी अन्य उर्वर सन्तानों की उत्पत्ति करता है और इस प्रकार अपनी संख्या में वृद्धि कर अपनी जाति के अस्तित्व को बराबर बनाए रखकर उसे विलुप्त होने से बचाता है। जीवों के प्रजनन में भाग लेने वाले अंगों प्रजनन अंग (Reproductive organs) तथा एक जीव के सभी प्रजनन अंगों को सम्मिलित रूप से प्रजनन तंत्र (Reproductive system) कहते हैं।

मानव प्रजनन तंत्र (Human reproductive system): मानव एकलिंगी (Unisexual) प्राणी है, अर्थात् नर और मादा लिंग अलग-अलग जीवों में पाये जाते हैं। जो जीव केवल शुक्राणु उत्पन्न करते हैं उसे नर कहते हैं। जिन जीवों से केवल अण्डाणु की उत्पत्ति होती है, उन्हें मादा कहते हैं। मानव में प्रजनन तंत्र अन्य जन्तुओं की अपेक्षा बहुत अधिक विकसित और जटिल होता है। मानव में अपडे का निषेचन (Fertilization) फैलोपियन नलिका (Fallopian tube) तथा भ्रूणीय तथा (Embryonic development) गर्भाशय (Uterus) में होता है। मानव जरायुज (viviparous) होते हैं अर्थात् ये सीधे शिशु को जन्म देते हैं। मानव में जनन अंग मादा में 12 से 13 वर्ष की उम्र में तथा नर में 15 से 18 वर्ष की उम्र में प्रायः क्रियाशील हो जाते हैं। प्रजनन अंग भी कुछ हार्मोन (Hormone) का स्राव (secretion) करते हैं जो शरीर में अनेक प्रकार के परिवर्तन लाते हैं। ऐसे परिवर्तन मादा में प्रायः वक्ष तथा जनन अंगों पर बाल उगने तथा नर में दाढ़ी एवं मूंछ आने से परिलक्षित होता है। मानव में नर तथा मादा प्रजनन अंग पूर्णतया अलग अलग होते हैं।

रासायनिक आबंध ( Chemical Bonding)

 


किसी अणु में दो या दो से अधिक परमाणु जिस बल के द्वारा एक दूसरे से बंधे होते हैं उसे रासायनिक आबन्ध (केमिकल बॉण्ड) कहते हैं। ये आबन्ध रासायनिक संयोग के बाद बनते हैं तथा परमाणु अपने से सबसे पास वाली निष्क्रिय गैस का इलेक्ट्रान विन्यास प्राप्त कर लेते हैं। [1]





दूसरे शब्दों में, रासायनिक आबन्ध वह परिघटना है जिसमें दो या दो से अधिक अणु या परमाणु एक दूसरे से आकर्षित होकर और जुड़कर एक नया अणु या आयन बनाते हैं (एक विशेष प्रकार के बन्धन 'धात्विक बन्धन' में यह प्रक्रिया भिन्न होती है)। यह प्रक्रिया सूक्ष्म स्तर पर होती है, लेकिन इसके परिणाम का स्थूल रूप में अवलोकन किया जा सकता है, क्योंकि यही प्रक्रिया अनेकानेक अणुओं और परमाणुओं के साथ होती है। गैस में ये नये अणु स्वतन्त्र रूप से मौजू़द रहते हैं, द्रव में अणु या आयन ढीले तौर पर जुडे रहते हैं और ठोस में ये एक आवर्ती (दुहराव वाले) ढाँचे में एक दूसरे से स्थिरता से जुड़े रहते हैं।

आबंध के प्रकार 

सामान्यतः रासायनिक आबन्ध को तीन भागों में विभाजित किया जाता है-

1. आयनिक बन्ध- यह बन्ध आयनों के मध्य आकर्षण से बनता है।

2. सहसंयोजक आबन्ध - इलेक्ट्रॉन के समान साझा से बनता है।

3. उपसहसंयोजक आबन्ध - इलेक्ट्रॉन के असमान साझेदारी से बनता है।