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विकासखंड - नैनपुर, ज़िला - मंडला (मध्य प्रदेश)

बुधवार, 23 दिसंबर 2020

प्रथम कोटि अभिक्रिया , FIRST ORDER REACTION

 


प्रथम कोटि अभिक्रिया :

वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया की दर अभिकारक पदार्थ की सान्द्रता की प्रथम घात
 के समानुपाती होती हैै , प्रथम कोटि अभिक्रिया
 ( first order reaction ) कहलाती है |

    A           →          उत्पाद

a mole             0    T = 0 sec
(a-x) mole     x mole T = t sec

माना किसी अभिकारक पदार्थ की प्रारम्भिक सान्द्रता (a)  
मोल है  तथा t sec  पश्चात् इसके x mole वियोजित हो 
जाते है  तब प्रथम कोटि  की अभिक्रिया के लिए ,

        dx/dt  ∝   [A] ¹

        dx/dt  =  k  [A]¹



जहाँ , k =  प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक

               dx/dt  =  k ( a - x )

         dx/( a -x) =  k dt


दोनो पक्षोँ  का समाकलन करने पर ,

        ∫ dx / ( a - x ) =  ∫ k dt

- log e ( a - x ) = kt + I (आई)  ......(समीकरण 1 )

जहाँ I = समाकलन नियतांक ( Integration constant )

प्रारम्भ में , जब t = 0 तब  x = 0

उपरोक्त मान समीकरण (1) में रखने पर

- log e ( a - 0 )=k × 0 + I

- log e a = I

 ⇒    I = - log e a

I का  मान समीकरण (1) में रखने पर,

- log e (a - x) = kt - log e a

log e a - log e (a - x) = kt

log e (a / a-x) = kt

k = 1 / t  log e (a / a - x)

k = 2.303 / t  × log 10 (a / a - x)
........(समीकरण 2 )

 

उदाहरण :-
1. एस्टर का जल-अपघटन :-

CH3COOC2H5 + H2O  →

CH3COOH + C2H5OH

यह अभिक्रिया प्रथम कोटि की अभिक्रिया है क्योकिं अभिक्रिया की दर केवल ऐथिल ऐसिटेट की सान्द्रता पर निर्भर करती है |

शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए व्यंजक व्युत्पत्ति



वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमेँ अभिक्रिया की दर अभिकारक पदार्थोँ के सक्रिय द्रव्यमानोँ की शून्य घात के समानुपाती होती हैँ , शून्य कोटि अभिक्रिया कहलाती हैँ ।

माना किसी पदार्थ की सान्द्रता a mole है ,
 तथा t sec पश्चात् पदार्थ के  x mole वियोजित हो जाता है । तब -
अभिक्रिया की दर ∝ [A]

       dx/dt  ∝   [A]

शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए  

dx/dt  =    k [A]

जहाँ , k = शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक

         dx/dt = k (a - x) 0

        dx/dt    =   k

       dx = k  dt

दोनो पक्षोँ  का समाकलन करने पर ,

           ∫ dx=  ∫ k dt

              x = kt +I
जहाँ I =समाकलन नियतांक
प्रारम्भ मेँ
जब t = 0 sec

तब  x = 0

उपरोक्त 0 = k  × 0 + I   ⇒   I = 0

I का मान समीकरण (1) मेँ रखने पर

x  = kt

k  =  x/t

शून्य कोटि अभिक्रियाओँ के अभिलक्षण :-

1. शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए अभिक्रिया के वेग
स्थिराँक का मात्रक सान्द्रण समय KI-¹ अर्थात्
मोल लीटर KI-¹   सेकण्ड KI-¹  होता है ।
2. इस अभिक्रिया के लिए सान्द्रता तथा अभिक्रिया की
दर के बीच ग्राफ खीँचने तर एक सरल रेखा प्राप्त होती है ,
अर्थात अभिक्रिया की दर पदार्थ की सान्द्रता पर निर्भर नहीँ करता है |


x/dt   का t के विपरीत आलेख समय अक्ष के समान्तर
एक सरल रेखा होती है ।

3. अभिक्रिया के किसी भी आंशिक परिवर्तन के
पूर्ण होने मेँ लगा समय प्रारम्भिक सान्द्रता 'a' के अनुक्रमानुपाती होता है ।
5. शून्य कोटि अभिक्रियाओँ के पूर्ण होने मेँ एक निश्चित समय लगता है ।

* अर्द्धआयु काल :-
 
वह समय जिसमेँ कोई अभिकारी पदार्थ अपनी
प्रारम्भिक मात्रा का आधा शेष रह जाता है
,वह उस पदार्थ का अर्द्धआयु काल कहलाता है ।
जब T = t½

तब x = a/2

उपरोक्त मान समीकरण (2) मेँ रखने पर ,

   k  =  a /2 /t½
         
t½  =  a / 2k  (   ∵ 2 तथा k = नियतांक )