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विकासखंड - नैनपुर, ज़िला - मंडला (मध्य प्रदेश)

सोमवार, 18 जनवरी 2021

रसायन शास्त्र अध्ययन की रणनीति ( Strategy for Study of Chemistry)


किसी भी चीज को समझ कर याद करना अच्छी बात है मगर कुछ Definitions, Derivations और Diagrams इतने ज़्यादा महत्वपूर्ण होते हैं उन्हें समझने के साथ-साथ लिखकर याद करना (या दूसरे शब्दों में रटना) बहुत ज़रूरी होता है l


Important Questions Class 12th Chemistry Board Exams

11वीं & 12वीं के तीन विषय Physics, Chemistry और Biology में अगर तुलना की जाये तो यह कहना गलत नहीं होगा की Chemistry का सिलेबस सबसे ज़्यादा होता है l इसलिए Chemistry जैसे विषय के लिए सेलेक्टिव स्टडी करना बहुत ज़रूरी हैं l कक्षा 12वीं की Chemistry में कुछ कांसेप्ट CBSE और MP की बोर्ड परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है l इन Concepts से जुड़े सवाल हर साल बोर्ड परीक्षा में पूछें जाते हैं l

किसी भी Topic को समझ कर याद करना अच्छी बात है मगर कुछ Derivations और Diagrams इतने ज़्यादा महत्वपूर्ण होते हैं उन्हें समझने के साथ-साथ लिखकर याद करना (या दूसरे शब्दों में रटना) बहुत ज़रूरी होता है l लिखकर याद करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि एग्जाम में आपको रिकॉल करने में समय नहीं लगता और आप बहुत कम समय में उत्तर लिख सकते हैं l

अगर हम पुराने 5 से 10 साल के पेपर्स की एनालिसिस करेंगे तो पाएंगे कि कुछ ख़ास कंसेप्ट्स पर हर साल सवाल पूछे जा रहे हैं l सवाल घुमा फिरा कर हर साल पूछे जा रहे हैं l अगर आप MP board या दूसरे State Boards के पेपर्स देखेंगे तो आप पाएंगे कि उन पेपर्स में भी कुछ इसी तरह के सवाल बार-बार पूछे गए हैं l

लिब्रे ऑफिस (Brief information for IT Students)

 लिब्रे ऑफिस (Libre Office) क्‍या है लिब्रे ऑफिस के बारे में जानना क्‍यों जरूर है और LibreOffice को CCC Course के Syllabus में भी शामिल किया गया है लिब्रे ऑफिस (Libre Office) में वह क्या खास बातें हैं जो इसको Microsoft Office से अलग बनाती हैं आखिर Libre Office को ही क्यों गवर्नमेंट ने CCC Exam के लिए चुना इस पोस्ट में हम जाने वाले हैं लिब्रे ऑफिस (LibreOffice) के बारे में Complete Information और उससे जुड़े हुए महत्वपूर्ण तथ्य - Kya Hai Libreoffice


अगर आप Government Job के लिए आवेदन कर रहे होंगे तो आपको एक Computer Course जरूर करना होगा “Course On Computer Concept” जिसे हिंदी में “कंप्यूटर अवधारणा पर कोर्स” कहते है CCC के syllabus में कुछ वर्षों से लिब्रे ऑफिस (LibreOffice) को जोड़ा गया है तो अगर आप CCC Exam एग्जाम देने जा रहे हैं तो आपको  Libre Office के संबंधित सारे महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर मालूम होने चाहिए


LibreOffice in Hindi, Libreoffice writer, Libreoffice calc, Libreoffice impress, Libreoffice base, Libreoffice draw Libreoffice math,

लिब्रे ऑफिस क्‍या है - What is Libre Office in Hindi 

Libre Office माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस की तरह ही एक Office Suite है लेकिन लिब्रे ऑफिस बिल्कुल मुफ्त है यह एक Open Source Software है इसका मतलब इसे लिब्रे ऑफिस को इसकी Official Website "www.LibreOffice.org" से Free download किया जा सकता है 

लिब्रे ऑफिस सभी प्रकार के GUI Based Operating System पर काम करता है जैसे Microsoft Windows, Linux, Apple Mac OS इत्यादि Libre Office में Microsoft Word की तरह Word Processing के लिए Libreoffice Writer दिया गया है इसी तरह Microsoft Excel के स्थान पर Libreoffice calc और Power Point के स्थान पर Libreoffice Impress,  Microsoft access के स्थान पर Libreoffice base इसके अलावा Drawing बनाने के लिए Libreoffice draw साथ ही अगर आपको Mathematical Equation लिखनी है तो इसके लिए इसमें Libreoffice math प्रोग्राम भी शामिल है 

लिब्रे ऑफिस का इतिहास - History of LibreOffice

लिब्रे ऑफिस को द डॉक्यूमेंट फाउंडेशन द्वारा विकसित किया गया है इसे पहली बार 25 जनवरी 2011 को लांच किया गया था लिब्रे ऑफिस की Programming सी प्लस प्लस जावा और पाइथन Programming Languages में की गई है यह बिल्कुल निशुल्क और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर है 

Libre Office suite के Components

  1. Libreoffice writer
  2. Libreoffice calc
  3. Libreoffice impress
  4. Libreoffice base
  5. Libreoffice draw
  6. Libreoffice math

Libreoffice Writer क्या है

MS Office के Ms word के जैसा Libreoffice में "Libreoffice Writer" के नाम से Program होता हैं। Libreoffice Writer एक Word Processor (शब्द संसाधक) है जिसमें किसी भी Document को Edit करने Format और Print करने के लिए प्रोग्राम किया गया है इसमें वह सभी Option मौजूद हैं जो एक Word Processor में होने चाहिए Libreoffice Writer का File Extension ".odt" है

Word processor के अन्‍य उदाहरण ये हैं - 
  • Ms Word
  • Open Office 
  • Google Document

Libreoffice Calc क्या है

MS Office के Ms Excel के जैसा Libreoffice में "Libreoffice Calc" के नाम से प्रोग्राम होता हैं। Libreoffice Calc Spread Sheet Program है, जो Numerical Data को Tabular Format में Open, Create, Edit, Formatting, Calculate और print करने का कार्य करता है जैसा कि आप जानते हैं Microsoft Office में Excel एक Spreadsheet software है उसी तरह से Libreoffice में "Calc" एक Spreadsheet Software है जो सारे काम आप Microsoft excel में कर सकते हैं वह सभी काम आप "Libreoffice Calc" में कर सकते हैं Libreoffice Calc का File Extension ".ods" है

Spreadsheet Software के अन्‍य उदाहरण ये हैं - 
  • Microsoft excel
  • Google Spreadsheet

Libreoffice Impress क्‍या है 

Microsoft Office में Office Presentation के लिए Slide Show तैयार करने के लिए बनाने के लिए Microsoft Power Point के समान ही Libreoffice में Libreoffice Impress प्रोग्राम को जोड़ा गया है Libreoffice Impress के माध्यम से सूचनाओं को Graphics और Multimedia के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है जिससे उन्हें बड़ी आसानी से समझा जा सकता है Libreoffice Impress का File Extension ".odp" है 

Slide Show Software के अन्‍य उदाहरण ये हैं - 
  • Microsoft Power point
  • Google Slide

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस और लिब्रे ऑफिस में अंतर

  1. लिब्रे ऑफिस एक फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर है
  2. माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस आप को खरीदना पड़ता है इसके लिए आपको मासिक या वार्षिक शुल्क देना पड़ता है
  3. लिब्रे ऑफिस सभी प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम्स में काम करता है
  4. माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस सिर्फ विंडोज और एप्पल OS ऑपरेटिंग सिस्टम में ही काम करता है
  5. दोनों सॉफ्टवेयर को प्रयोग करना लगभग एक समान ही है
  6. माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस सुइट को डाउनलोड किया जाता है तो उसकी एप्लीकेशन के लिए अलग-अलग लिंक दिए गए हैं
  7. लिब्रे ऑफिस का एक डैशबोर्ड दिया गया है जहां से आप सभी एप्लीकेशन को साथ देख सकते हैं और रन करा सकते हैं
  8. माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस की तुलना में लिब्रे ऑफिस का जल्दी-जल्दी अपडेट किया जाता है जिससे सॉफ्टवेयर में नये नये फीचर हर दो-तीन महीने के अंदर जुड़ते रहते हैं
  9. माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस महंगा होने की वजह से बहुत कम लोग खरीदते हैं और माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के पायरेटेड वर्जन आपके कंप्यूटर को नुकसान पहुंचा सकते हैं
  10. लिब्रे ऑफिस क्योंकि समय-समय पर अपडेट होता है और उसकी पायरेसी नहीं होती है क्योंकि वह फ्री है और एक ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर है इस वजह से यह आपके कंप्यूटर को नुकसान नहीं पहुंचाता है और हर किसी की पहुंच में आसानी से आ जाता है
  11. लिब्रे ऑफिस का एप्‍लीकेशन साइज भी बहुत छोटा है जिसे आप आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं
  12. लिब्रे ऑफिस आपके कंप्यूटर की रैम और प्रोसेसर कम होने पर भी यह बहुत अच्छे से काम करता है
तो आशा है आप समझ गए होंगे लिब्रे ऑफिस को इतना महत्व क्यों दिया जा रहा है और क्यों सरकारी ऑफिसों में भी इसका इस्तेमाल किए जाने पर जोर दिया जा रहा है

उपसहसंयोजक यौगिक (coordination complex या metal complex)

 उपसहसंयोजक यौगिक (coordination complex या metal complex) उन यौगिकों को कहते हैं जिनमें कोई परमाणु या आयन (प्रायः धात्विक) उसको घेरे हुए अणुओं या धनायनों के व्यूह (array) से जुड़ा हो। बहुत से धातु-युक्त यौगिक उपसहसंयोजक यौगिक ही हैं।

सिसप्लेटिन, PtCl2(NH3)2 इसमें एक प्लेटिनम परमाणु के साथ चार संलग्नी (लिगण्ड) हैं।

'उपसहसंयोजक यौगिक' का और अधिक व्यापक परिभाषा यह है -

उपसहसंयोजक यौगिक वह है जिसमें कोई परमाणु अपने आक्सीकरण संख्या से भी अधिक संख्या वाली रासायनिक वस्तुओं (chemical species) से बन्धन बनाता है।

अनेकों प्रकार के उपसहसंयोजक यौगिक मौजूद हैं जिनमें जलीय विलयन में धातु (जल के अणुओं से उपसहसंयोजित) से लेकर विभिन्न जैवरासायनिक प्रक्रियाओं में भाग लेने वाले जटिल धात्विक एंजाइम आदि हैं।

उपसहसंयोजक बन्ध तब बनता है जब साझेदारी में जब एक ही तत्व द्वारा दोनों इलेक्ट्रान दिये जायँ। जो तत्व इलेक्ट्रान युग्म देता है वह दाता (donor) है और दूसरा वाला ग्राही (acceptor) है। इसे प्राय: तीर द्वारा ( --> ) प्रदर्शित किया जाता है। हाइड्रोजन पराक्साइडसल्फर डाइआक्साइड, हाइड्रोनियम आयन, फेरोसायनाइड आदि इसके कुछ उदाहरण हैं।

ऐल्फ्रेड वेर्नर ने धातुओं की सामान्य बंधुता को 'प्राथमिक' बंधुता कहा। कुछ धातुओं में प्राथमिक बंधुता के अतिरिक्त एक और बंधुता होती है, जिसे 'द्वितीयक' बंधुता कहते हैं। इस द्वितीयक बंधुता को ही 'उपसहसंयोजकता' का और ऐसे बने यौगिकों की 'उपसहसंयोजक-यौगिक' का नाम दिया। ऐसे यौगिकों को वेर्नर ने उच्च वर्ग यौगिक कहा है।

घनात्मक आयन, विशेषत: जब वे छोटे और उच्च आवेशित होते हैं, पार्श्ववर्ती ऋणात्मक आयनों अथवा उदासीन अणुओं से, जिनमें 'असाझी' (unshared) इलेक्ट्रॉन रहते हैं, इलेक्ट्रॉन आकर्षित करते हैं। यदि आकर्षण अधिक है, तो धात्विक आयन और अन्य समूहों के बीच इलेक्ट्रॉन साझी हो जाता है। धात्विक आयन को यहाँ 'ग्राही' (acceptor) और अन्य समूह को 'दाता' (donor) कहते हैं। जब प्लैटिनिक क्लोराइड को अमोनिया के साथ उपचारित किया जाता है तब ऐसा ही यौगिक, हेक्सामिनिक प्लैटिनिक हेक्साक्लोराइड, बनता है।

रासायनिक संयोग का बनना ऐसे बने यौगिकों के रंग, विलेयता और अन्य गुणों की विभिन्नता से जाना जाता है। ऐसे बने प्लैटिनम के यौगिक में न प्लैटिनम के और न क्लोरीन के ही परीक्षक लक्षण पाए जाते हैं। जिन समूहों में असाझी इलेक्ट्रॉन रहते हैं, वे हैं अमोनिया (NH3), जल (H2O), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रिक ऑक्साइड (NO), ऐल्किल ऐमिन (RNH2), डाइऐल्किल ऐमिन (R2NH), ट्राइऐल्किल ऐमिन (R3N), ऐल्किल सल्फाइड (RSR), साइआनाइड (CN), थायोसाइआनाइड (SCN) आदि।


उपसहसन्योजकता:

यौगिकों में दो, या दो से अधिक, किस्म के दाता रह सकते हैं। केंद्र स्थित धात्विक आयनों में दाता समूहों की संख्या प्रत्येक धात्विक आयन के लिए निश्चित रहती है। ऐसी संख्या को उपसहसंयोजकता-संख्या (Coordination Number) कहते हैं। सिजविक (Sidgwick) के अनुसार यह संख्या तत्वों की परमाणु संख्या पर निर्भर करती है। यह दो से आठ तक हो सकती है। हाइड्रोजन की उपसहसंयोजकता संख्या दो है और भारी धातुओं की आठ। यदि दाता समूह या परमाणु में एक जोड़े से अधिक असाझी इलेक्ट्रॉन विद्यमान हों, तो ऐसे समूह या परमाणु दो धात्विक आयनों से संयुक्त हो सकते हैं। इस रीति से द्विनाभिक संमिश्र (dinuclear complex) बनते हैं। ऐसा ही एक द्विनाभिक संमिश्र डाइओल ऑवटेमिन डाइकोबाल्टिक सल्फेट (di-ol octamin dicobaltic sulphate) है:

यदि दाता परमाणु एक ही अणु में विद्यमान हैं पर कम-से-कम एक-दूसरे परमाणु से उनमें अलगाव है, तो इस प्रकार के बने वलय को 'कीलेट वलय' (Chelate ring) कहते हैं। कीलेटी करण से यौगिकों का स्थायित्व बहुत बढ़ जाता है। पाँच सदस्य वाले कीलेट वलय सबसे अधिक स्थायी होते हैं। चार या छ: सदस्य वाले कीलेट वलय भी सरलता से बन जाते हैं। यह प्रभाव कार्बनिक ऐमिनो-यौगिकों में स्पष्ट रूप से देखा जाता है। मोनोमेथिल ऐमिन कदाचित्‌ ही उपसहसंयोजक-योगिक बनता है, पर एथिलीन डाइऔमिन बड़ी सरलता से उपसहसंयोजक-यौगिक बनता है, जो बहुत स्थायी होता है। सामान्य द्वितीयक ऐमिन कदाचित्‌ ही उपसहसंयोजक-यौगिक बनता है, पर डाइएथिलीन ट्राइऐमिन (H2NCH2CH2NHCH2CH2NH2) बड़ी सरलता से भारी घात्विक आयनों के साथ दोनों नाइट्रोजनों से संयुक्त हो, बहुत स्थायी द्विक्‌ कीलेट वलय बनाता है।

ऐल्फा-ऐमिना अम्ल अनेक धातुओं के हाइड्रॉक्साइडों से अधिक क्रिया कर बहुत स्थायी योगिक बनाता है। इनमें अम्ल और ऐमिनो दोनों समूह धातु से संयुक्त होकर, कीलेट वलय बनाते हैं। यदि उपसहसंयोजकता-संख्या बंधुता से दुगुनी है, तो ऐसे यौगिक अनायनित (non-ionic) होते हैं और इन्हें 'आंतर लवण' (Inner salt) कहते हैं। ऐसे आंतर लवण कुछ हाइड्रॉक्सी अम्लों और डाइकीटोनों से भी बनते हैं। ऐसे यौगिक जल में अविलेय होने पर, कार्बनिक विलायकों में विलेय होते हैं। ये भाप में वाष्पशील भी होते हैं। कच्चे चमड़े पर क्रोमियम लवणों से चर्मशोधन में कुछ ऐसी ही क्रिया क्रोमियम लवण और चमड़े के पॉलिपेप्टाइडों के बीच होती है। चर्म का शोधन होना ऐसे ही आंतर लवण बनने के कारण समझा जाता है।

संरचना (Structure)



समावयवता (Isomerism)संपादित करें

उपसहसंयोजकता-यौगिकों में कई किस्म की समावयवता पाई गई है। इनमें अधिक महत्व की समावयवता निम्नलिखित प्रकार की है:

बहुलकीकरण (Polymerisation) समावयवतासंपादित करें

इसकी आणविक संरचना में सरलतम संरचना के गुणक होते हैं। हेक्सामिन कोबाल्टिक हेक्सानाइट्रो कोबाल्टेड [Co(NH3)6] [Co(NO2)6] अनायनित ट्राइनाइट्रो ऐमिन कोबाल्ट [Co(NH3)3 (NO2)3] का बहुलक है।

संरचना (Structural) समावयवतासंपादित करें

नाइट्राइट आयन के नाइट्रोजन और ऑक्सीजन दोनों के परमाणुओं में असाझी इलेक्ट्रॉन होते हैं, अत: ये कोबाल्टिक आयन से दो रीतियों से, एक ऑक्सीजन द्वारा और दूसरा नाइट्रोजन द्वारा, संबद्ध हो सकते हैं। इससे दो समावयव

(1) नाइट्रिटो-पेंटामिन कोबाल्टिक क्लोराइड [Co (NH3)5 ONO] CI2 और

(2) नाइट्रो-पेंटामिन कोबाल्टिक क्लोराइड [Co (NH3)5 NO2] Cl2

प्राप्त होते हैं।

उपसहसंयोजकता (Coordination) समावयवतासंपादित करें

इसमें घनात्मक और ऋणात्मक दोनों आयन होते हैं, पर उनका वितरण विभिन्न प्रकार का होता है, जैसे [Co (NH3)6] [Cr (CN)6] और [Cr (NH3)6] [Co (CN)6]

आयनन (Ionisation) समावयवतासंपादित करें

इसमें दोनों के संघटन एक से होते हैं, पर विलयन में ये विभिन्न आयनों में वियोजित होते हैं। कोबाल्टिक ब्रोमोपेंटामिन सल्फेट [Co(NH3)5 Br] SO4, सल्फेट आयन के और कोबाल्टिक सल्फेटो पेंटामिन ब्रोमाइड, [Co (HN3)3SO4]Br, ब्रोमीन आयन की अधिक्रिया देते हैं।

हाइड्रेट (Hydrate) समावयवतासंपादित करें

यह समावयवता क्रोमिक क्लोराइड के हेक्सा-हाइड्रेट में देखी जाती है। एक समावयव धूसर बैंगनी रंग का और दो हरे रंग के होते हैं। एक से सिल्वर नाइट्रेट विलयन द्वारा क्लोरीन तीनों परमाणु का, दूसरे से केवल दो क्लोरीन परमाणु का और तीसरे से केवल एक क्लोरीन परमाणु का, तत्काल अवक्षेपण होता है। इन तीनों के सूत्र इस प्रकार हैं:

[Cr(H2O)6] Cl3; [Cr (H2O)5Cl2H2O और [Cr (OH2)4 Cl2] Cl2 H2O*

त्रिविम समावयता (Stereo-isomerism)संपादित करें

उपसहसंयोजकता बंध सदिश (directional) होते हैं। इसकारण उपसहसंयोजकता समूह केंद्र स्थित होते हैं। प्लैटिनम आयन की चारों संयोजकताएँ (convalences) एक तल पर होती है। अत: इसके यौगिक प्लैटिनम डाइऐमिन डाइक्लोराइड दो रूप में, सिस रूप और ट्रैंस रूप में, प्राप्त हुए हैं।

इन दोनों के रंग, विलेयता और रासायनिक व्यवहार में भिन्नता होती है। ऐसा केवल प्लैटिनम के साथ ही नहीं होता, अन्य धातुओं, जैसे पेलैडियम, निकल, कैडमियम, पारद आदि के साथ भी ऐसा देखा जाता है। यदि उपसहसंयोजकता समूह छह हैं और उनमें दो अन्य चार समूहों से भिन्न हैं, तो उनके भी दो रूप, सिस और ट्रैंस हो सकते हैं। डाइक्लोरो-टेट्रामिन कोबाल्टिक क्लोराइड दो रूपों में पाया गया है। एक का रंग बैंगनी और दूसरे का हरा होता है।


वियोजनसंपादित करें

उपसहसंयोजक यौगिक प्रायः जटिल आयन होते हैं। इनमें से अधिकांश के जलीय विलयन आयनित नहीं होते और इस कारण विद्युत-अपघट्य नहीं होते। किन्तु इसके विपरीत, प्लेटिनम के निम्नलिखित उपसहसंयोजक यौगिक जल में वियोजित होकर जटिल आयन उत्पन्न करते हैं।

[Pt(NH3)6]Cl4 → [Pt(NH3)6]4+ + 4 Cl

[Pt(NH3)5Cl]Cl3 → [Pt(NH3)5Cl]3+ + 3 Cl

[Pt(NH3)4Cl2]Cl2 → [Pt(NH3)4Cl2]2+ + 2 Cl

[Pt(NH3)3Cl3]Cl → [Pt(NH3)3Cl3]+ + Cl

K[Pt(NH3)Cl5] → K+ + [Pt(NH3)Cl5]

K2[PtCl6] → 2 K+ + [PtCl6]2–

उपयोगसंपादित करें

उपसहसंयोजक-यौगिक अनेक प्रकार के होते हैं। इनमें से कुछ बड़े उपयोगी सिद्ध हुए हैं। इनका उपयोग उत्तरोत्तर बढ़ रहा है। भारी धातुओं के ऐसे ही संमिश्र साइआनाइड विद्युत लेपन में काम आते हैं। अनेक ऐसे यौगिक महत्व के वर्णक हैं। प्रशीयन ब्ल्यू, हीमोग्लोबिनक्लोरोफिल आदि ऐसे ही वर्णक हैं। कुछ यौगिक, विशेषत: अंतराल लवण, धातुओं को पहचानने, पृथक्‌ करने तथा उनकी मात्रा निर्धारित करने आदि में काम आते हैं।


उपसहसंयोजक यौगिकों के कुछ उदाहरण तथा उनके रंग