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विकासखंड - नैनपुर, ज़िला - मंडला (मध्य प्रदेश)

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शनिवार, 26 दिसंबर 2020

राजनीति विज्ञान का आधुनिक दृष्टिकोण



 राजनीति विज्ञान की आधुनिक अवधारणाओं की दृष्टि से जार्ज कैटलिन, डेविड ईस्टन, हैराल्ड लासवैल व काप्लान विशेष उल्लेखनीय है। इन विद्वानों ने राजनीति विज्ञान संबंधी अपने कथ्यों में राजनीति के वास्तविक एवं व्यावहारिक सन्दर्भों पर बल देते हुये उसे शक्ति, प्रभाव, राजनीतिक औचित्य एवं सत्ता का अध्ययन माना है।

आधुनिक दृष्टिकोण के समर्थक राजनीति शास्त्रियों द्वारा राजनीति विज्ञान के बारे में जो विचार प्रस्तुत किये हैं उनको निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है-

(१) राजनीति विज्ञान मानव क्रियाओं का अध्ययन है- राजनीति विज्ञान के आधुनिक दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति विज्ञान मानव के राजनीतिक व्यवहार एवं क्रियाओं का अध्ययन करता है। मानव व्यवहार को गैर राजनीतिक-कारक भी प्रभावित करते है। इन सभी कारकों का राजनीति विज्ञान में अध्ययन किया जाता है। ए. हर्ड एवं एस. हंटिग्टन का कथन है ’’राजनीतिक व्यवहारवाद शासन को मानव और उसके समुदायों के कार्यों की एक प्रक्रिया के रूप में स्वीकारता है। हस्जार व स्टीवेन्सन का यह विचार है कि ’’राजनीति विज्ञान अपने अध्ययन क्षेत्र में प्राथमिक रूप में व्यक्तियों के पारस्परिक व सामूहिक तथा राज्य एवं राज्यों के मध्य प्रकट शक्ति संबंधों से सम्बंधित है।

(२) राजनीति विज्ञान शक्ति का अध्ययन है- कैटलिन व लासवैल इस विचार के समर्थक है। दोनों के विवेचन का मुख्य आधार मनोविज्ञान है। कैटलिन ने 1927-28 में राज्य के स्थान पर मनुष्य के राजनीतिक क्रिया कलाप के अध्ययन पर बल देते हुये राजनीति को प्रभुत्व एवं नियंत्रण के लिये किये जाने वाला संघर्ष बताया है। उसके मतानुसार संघर्ष का मूल स्रोत मानव की यह इच्छा रही है कि दूसरे लोग उसका अस्तित्व मानें। 1962 में अपनी पुस्तक सिस्टेमैटिक पॉलिटिक्स में कैटलिन ने लिखा है- नियंत्रण भावना के कारण जो कार्य किये जाते है तथा नियंत्रण की भावना पर आधारित संबंधों की इच्छाओं के कारण जिस ढाँचे व इच्छाओं का निर्माण होता है, राजनीति शास्त्र का संबंध उन सबसे है। अन्य शक्तिवादी विचारक लासवैल की मान्यता है कि समाज में कतिपय मूल्यों व मूल्यवान व्यक्तियों की प्राप्ति के लिये हर व्यक्ति अपना प्रभाव डालने की चेष्टा करता हैं तथा प्रभाव चेष्टा में शक्ति भाव निहित रहता है। अतः लासवैल के अनुसार 'राजनीति शास्त्र का अभीष्ट वह राजनीति है जो बतलाये कि कौन, क्या, कब और कैसे प्राप्त करता है।' उसके अनुसार राजनीतिक क्रियाकलाप का प्रारंभ उस परिस्थिति से होता है जिसमें कर्ता विभिन्न मूल्यों की प्राप्ति के लिये प्रयत्न करता है तथा शक्ति जिसकी आवश्यक शर्त होती है।


(३) राजनीति विज्ञान राज-व्यवस्थाओं का अध्ययन है- इस दृष्टिकोण के समर्थक डेविड ईस्टन, आमण्ड, आर. केगन आदि है। यह दृष्टिकोण राजनीति विज्ञान को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण में परिभाषित करता हैं। इनकी मान्यता है कि सम्पूर्ण समाज स्वयं में एक व्यवस्था है और राज व्यवस्था इस सम्पूर्ण समाज व्यवस्था की एक उपव्यवस्था है तथा वह उसके एक अभिन्न भाग के रूप में होती है। राज्य व्यवस्था में अनेक क्रियाशील संरचनाएॅ होती हैं जैसे संविधान सरकार के अंग, राजनीतिक दल, दबाब समूह, लोकमत एवं निर्वाचन एवं मानव-व्यववहार इस व्यवस्था का अभिन्न भाग है। संक्षेप में इन विद्वानों की मान्यता है कि राजनीति विज्ञान सम्पूर्ण समाज व्यवस्था के अंग के रूप में राज-व्यवस्था की इन संरचनाओं की पारस्परिक क्रियाओं एवं संबंधों तथा मानव के राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन करता है। राजनीति विज्ञान राजव्यवस्था के अध्ययन के अन्तर्गत निम्न तथ्यों पर अधिक बल देता है -संपूर्ण समाज व्यवस्था के अंग के रूप में राजनीतिक प्रक्रिया का अध्ययन, व्यवस्था की संरचना एवं समूहों के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन।

(४) राजनीति विज्ञान निर्णय प्रक्रिया का अध्ययन है- इस दृष्टिकोण के समर्थक राजनीतिशास्त्री यह मानते है कि राजनीति विज्ञान सरकार का अध्ययन करते हुये समाज या राज्य में विद्यमान परिस्थितियों के सन्दर्भ में सरकार या शास्त्र के नीति संबंधी निर्णय लेने की प्रक्रिया का भी अध्ययन करता है। इस कारण राजनीति विज्ञान ऐसा विज्ञान है जो किसी शासन की नीति-प्रक्रिया एवं उसके द्वारा नीति निर्माण का अध्ययन करता है विशेषकर इन दोनों को प्रभावित करने वाले कारकों के संदर्भ में, इस दृष्टिकोण की मान्यता है कि मानव प्रकृति के सन्दर्भ में सरकार द्वारा नीति निर्माण-प्रक्रिया का का अध्ययन किया जाना चाहिए। वास्तविक राजनीतिक जीवन में शासन के नाम पर निर्णय लेने का कार्य स्वयं व्यक्ति करते हैं और इसलिये निर्णय निर्माण प्रक्रिया पर निर्णयकर्ताओं के व्यक्तित्व, अभिरूचि संस्कृति, धर्म, राजनीतिक विचारधारा, मानसिक स्तर निर्णय लेने की शक्ति आदि तत्वोंं का व्यापक प्रभाव पड़ता है।

अतः यह कहा जा सकता है कि आधुनिक दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति विज्ञान मनुष्य के सामाजिक राजनीतिक जीवन का अध्ययन करता है। इसके अन्तर्गत राजनीतिक प्रक्रियाओं के साथ साथ राजनीतिक संगठनों का भी अध्ययन किया जाता है। पिनॉक एवं स्मिथ के अनुसार क्या है (यथार्थ) तथा क्या होना चाहिये (आदर्श) और इन दोनों के बीच यथासंभव समन्वय कैसे प्राप्त किया जाये, इस दृष्टि से हम सरकार तथा राजनीतिक प्रक्रिया के व्यवस्थित अध्ययन को राजनीति विज्ञान कहते है।


राजनीति विज्ञान के क्षेत्र:

आधुनिक युग में राजनीति विज्ञान का क्षेत्र अत्यधिक विकसित है। शक्ति के सन्दर्भ में राजनीति की सर्वव्यापकता ने उसे हर तरफ पहुंचा दिया है और न केवल सामाजिक बल्कि व्यक्गित जीवन के भी लगभग सभी पक्ष राजनीतिक व्यवस्था के अधीन है। राजनीति की सर्वव्यापकता ने जहाँ एक तरफ राजनीतिक व्याख्याओं की लोकधर्मिता सिद्ध की है वहीं उसने राजनीतिक क्या है, इस संबंध में अस्पष्टता व भ्रम भी पैदा किया हैं। इसके बावजूद राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र को राज्यप्रधान व राज्येतर सन्दर्भों में भलीभांति समझा जा सकता है।

राज्यप्रधान संदर्भ में राज्य की अवधारणाओं- समाजवाद, लोकतंत्र इत्यादि, सरकार या संगठन संविधान वर्णित व वास्तविक व्यवहार संबंधी, सरकारी पद व संस्थाओं के पारस्परिक संबंध, निर्वाचन, व्यवस्थापिका व न्यायपालिका के संगठनात्मक व प्रयोगात्मक पक्ष तथा राज्य की व्याख्या से सम्बंधित राजनीतिक विचारधारा व अवधारणाएॅ, उत्पत्ति के, राज्य क्रियाशीलता के सिद्धान्त, राज्य-परक विचारधाराएँ स्वतंत्रता, समानता, अधिकार इत्यादि।

राज्येत्तर सन्दर्भ में राजनीति की प्रक्रियात्मक वास्तविकता, राजनीति व्यवस्था के विभिन्न दृष्टिकोण, राज्येत्तर संस्थाएॅ जैसे राजनीतिक दल, दबाव व हित समूह, गैर राज्य-प्रक्रियाएॅ व उनका विस्तार, अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक वास्तविकताएॅ तथा जटिलताएॅ इत्यादि आती हैं। प्रतिनिधित्व के सिद्वान्तों व विधियों को भी इसी सन्दर्भ में समझा जा सकता है।

राजनीति विज्ञान के अध्ययन क्षेत्र के बारे में आधुनिक दृष्टिकोण की कुछ आधारभूत मान्यताऐं हैं जैसे- अध्ययन क्षेत्र के निर्धारण में यथार्थपरक दृष्टिकोण अपनाना, राजनीतिक विज्ञान की विषय वस्तु को अन्तर-अनुशासनात्मक दृष्टिकोण के अन्तर्गत समझा जाये, राजनीति विज्ञान के अध्ययन में वैज्ञानिक पद्धति व उपागमों को प्रयोग में लाया जाये।

आधुनिक दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति विज्ञान के क्षेंत्र को निम्न बिंदुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है-

(१) मानव के राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन- आधुनिक दृष्टिकोण मानव के राजनीतिक व्यवहार के अध्ययन पर बल देता है। यद्यपि पर मानव व्यवहार को प्रभावित करने बल्कि गैर-राजनीतिक तत्वों का भी अध्ययन करता है उसकी मान्यता है कि मानव व्यवहार को यथार्थ रूप में समझने के लिये उन सभी गैर राजनीतिक भावनाओं, मान्यताओं एवं शक्तियों के अध्ययन को सम्मिलित किया जाये जो मानव के राजनीतिक व्यवहार को प्रभावित करते है।

(२) विभिन्न अवधारणाओं का अध्ययन - आधुनिक राजनीति विज्ञान मुख्यतः शक्ति, प्रभाव, सत्ता, नियंत्रण, निर्णय प्रक्रिया आदि का वैज्ञानिक अध्ययन करता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार ये ऐसी अवधारणाऐं है जिनकी पृष्ठभूमि में ही राजनीतिक संस्थाएॅ कार्य करती है। राजनीतिशास्त्री इन्हीं अवधारणाओं के परिप्रेक्ष्य में राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन करते है। इसी कारण इस प्रकार के अध्ययन को सत्ताओं का अनौपचारिक अध्ययन कहा गया है।

(३) राजनीति विज्ञान समस्याओं एवं संघर्षों का अध्ययन - आधुनिक राजनीतिशास्त्री यथा प्रोफेसर डायक एवं पीटर ओडगार्ड राजनीति शास्त्र को सार्वजनिक समस्याओं व संघर्षों का अध्ययन क्षेत्र में शामिल करते है। उनके मत में मूल्यों एवं साधनों की सीमितता के कारण उनके वितरण की समस्या पैदा होने से तनाव व राजनीति का प्रारंभ हो जाता है। वह राजनीतिक दलों के अतिरिक्त विभिन्न व्यक्तियों व समूहों में तक में फैल जाती हैं। प्रोफेसर डायक ने राजनीति को सार्वजनिक समस्याओं पर परस्पर विरोधी इच्छाओं वाले पात्रों के संघर्ष की राजनीति कहा है। पीटर ओडीगार्ड की मान्यता है कि इस संघर्ष में राजनीति के अलावा अन्य बाह्यतत्वों का नियंत्रण नहीं होना चाहिये।

(४) सार्वजनिक सहमति व सामान्य अभिमत का अध्ययन - कुछ विद्वानों के मत में राजनीति विज्ञान सार्वजनिक समस्याओं पर सहमति व सामान्य अभिमत का अध्ययन है। उनके विचार में संघर्ष संघर्ष के लिए ही नहीं वरन सामान्य सहमति व सामान्य अभिमत को प्रभावित करने के लिये होता है। इसीलिये एडवर्ड ने कहा है कि ‘किसी मसले को संघर्षमय बनाने अथवा सुलझाने वाली गतिविधियों (समझौता वार्ता, तर्क-वितर्क, विचार विमर्श शक्ति प्रयोग आदि) सभी राजनीति का अंग है।’’

उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि आधुनिक दृष्टिकोण के विद्धानों में राजनीति विज्ञान के क्षेत्र के संबंध में कुछ मतभेद होने के बावजूद कुछ आधारभूत बातों पर सहमति है, जैसे सभी की मान्यता है कि राजनीति विज्ञान का अध्ययन क्षेत्र यथार्थवादी हो, इसके अध्ययन में अंतर-अनुशासनात्मक दृष्टिकोण व वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग होना चाहिए। हालांकि यह सत्य है कि आधुनिक राजनीतिशास्त्रियों का राजनीति विज्ञान में वैज्ञानिक प्रामाणिकता व सुनिश्चितता का दावा अभी पूर्ण नहीं हुआ है।