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विकासखंड - नैनपुर, ज़िला - मंडला (मध्य प्रदेश)

बुधवार, 20 जनवरी 2021

रसायन विज्ञान: अम्ल और क्षार में अंतर



अम्ल और क्षार में अंतर


अम्लक्षार
1अम्ल एक ऐसा पदार्थ है जिसे पानी में मिलाने पर हाइड्रोजन आयन की कंसंट्रेशन बढ़ जाती हैक्षार की बात करें तो इसे पानी में मिलाने से हाइड्रोक्साइड की कंसंट्रेशन में बढ़ोतरी हो जाती है।
2अम्ल प्रोटॉन डोनर कहलाए जाते हैंक्षार को प्रोटॉन एक्सेप्टर कहा जाता है।
3अम्ल एक ऐसा पदार्थ होता है जब वह तरल अवस्था में होता है तो उसका पीएच मान 7 से कम होता है।क्षार एक ऐसा पदार्थ होता है जोकि तरल अवस्था में 7 से अधिक पीएच मान देता है।
4अम्ल विद्युत के एक अच्छे परिचालक होते हैंक्षार केवल तरल स्थिति में ही विद्युत के एक अच्छे परिचालक के तौर पर जाना जाता है।
5अम्ल को चखने पर खट्टा सा स्वाद आता हैक्षार की बात करें तो इसके स्वाद में कड़वापन मौजूद रहता है।
6अम्ल को सूंघने पर जलने की महक से आती हैक्षार को सूंघा जाए तो अमोनिया के अलावा सभी क्षार गंधहीन होते हैं।
7मेटल्स के साथ प्रतिक्रिया करने पर अम्ल हाइड्रोजन गैस को बनाते हैं,क्षार फैट और तेल के साथ ही प्रतिक्रिया करते हैं।
8अम्ल अमोनियम क्लोराइड के साथ कोई भी प्रतिक्रिया नहीं करता हैजबकि क्षार अमोनियम क्लोराइड के साथ प्रतिक्रिया में अमोनिया का निर्माण करता है जो कि एक गंध रहित गैस होती है।
9कार्बोनेट के साथ प्रतिक्रिया करने पर अम्ल कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण करता है|जबकि क्षार कार्बोनेट के साथ कोई भी प्रतिक्रिया नहीं करता है।
10लिटमस टेस्ट की बात करें तो अम्ल नीले लिटमस कागज को लाल में परिवर्तित कर देता हैक्षार लाल लिटमस कागज को नीले रंग में।
11अम्ल के उदाहरण हैं हाइड्रोक्लोरिक अम्ल(HCL), सल्फ्यूरिक अम्ल(H2SO4) नाइट्रिक अम्ल,(HNO3),कार्बनिक अम्ल(H2CO3क्षार के उदाहरण है अमोनियम हाइड्रोक्साइड (NH4OH), कैलशियम हाइड्रोक्साइड(Ca(OH)2), सोडियम हाइड्रोक्साइड(NaOH)
12अम्ल का इस्तेमाल संरक्षक, खाद, कार्बोनेटेड ड्रिंक जैसे पेप्सी, कोकोकोला ड्यू मे किया जाता है। इसके अलावा इसे लेदर को बनाने और खाने में फ्लेवर देने के लिए इस्तेमाल में लिया जाता है।क्षार को जठरीय दवाइयों, साबुन, डिटर्जेंट, परफ्यूम आदि में काम में लिया जाता है।
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BIOLOGY: कोशिका किसे कहते है, सिद्धांत, संरचना और प्रकार

 कोशिका किसे कहते है इसके प्रकार और संरचना एवं भाग कोशिका भित्ति ,जीवद्रव्य,रिक्तिका और इसके प्रकार एवं कार्य यहांयाहनुर पर पूरी जानकरी है जो परीक्षाओं में आती है.

कोशिका ( Cell ) जीवन की रचनात्मक , कार्यात्मक और मूलभूत इकाई हैं |

सर्वप्रथम कोशिका की खोज Robert hook ने कोर्क में की जो एक म्रत कोशिका थी |

ल्यूवेन हॉक ने सर्वप्रथम जीवित कोशिका की खोज की |

कोशिका विज्ञान ( Cytology) के जनक Robert hook को कहा जाता हैं |

जीवो की जैविक क्रियाओं की रचना करने वाली तथा उनका संचालन करने वाली मौलिक इकाई को कोशिका कहते हैं|

कोशिका में स्वजनन पाया जाता हैं | R. virchow ने बताया कि नयी कोशिका का निर्माण पुरानी कोशिका से विभाजन द्वारा होता हैं | तंत्रिका कोशिका (Nerve cell ) मनुष्य की सबसे बड़ी कोशिका जबकि सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्मा ( PPLO ) हैं | सबसे भारी और बड़ी कोशिका शुतुर्मुर्ग चिड़िया का अंडा हैं |

कोशिका सिद्धांत  (Cell Theory )

कोशिका की खोज के कई वर्षो बाद कोशिका का अनेक वैज्ञानिको ने विस्तृत अध्ययन किया

और फिर  1838 ई. मे जर्मनी के वनस्पति वैज्ञानिक एम. जे. शलाइडेन ( M.J.Schleiden ) तथा जर्मनी के ही जन्तु वैज्ञानिक थियोडर श्वान(theodor schwann ) ने कोशिका सिद्धांत प्रतिपादित किया

कोशिका सिद्धांत की मुख्य बातें निम्न प्रकार

1. कोशिका सिद्धांत से यह ज्ञात होता है प्रत्येक जीव का शरीर एक या अनेक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है अर्थात जीव एक कोशिकीय (unicellular )और बहुकोशिकीय(multicellular ) दोनों प्रकार के होते है

2. कोशिका जीवों की सबसे छोटी संरचनात्मक इकाई(Structural unit ) के साथ-साथ क्रियात्मक इकाई (Functional unit )भी होती है कियोकि कोशिका ही शरीर का निर्माण करती है और जीवन सम्बन्धी सभी क्रियाएं कोशिका मे ही होती है

 3. प्रत्येक कोशिका की उत्पत्ति मातृ कोशिका(parents Cell ) से होती है जिसका अर्थ है कोशिका मे जनन क्षमता पाई जाती है

 4. एक विशेष प्रकार की अनेक कोशिकाएं मिलकर ऊतक (tissue )बनाती है

 5. कोशिका की उत्पत्ति जिस क्रिया से होती है उसमें केंद्रक (Neucleus )का मुख्य काम होता है

कोशिका सिद्धांत के अपवाद

इस कोशिका सिद्धांत को लम्बे समय तक कोशिका सिद्धांत ही माना जाता रहा किंतु कुछ समय के बाद वैज्ञानिकों ने इसका अध्ययन किया और विषाणु को कोशिका सिद्धांत का अपवाद बताया कियोकि विषाणु कोशिका ही नहीं है तथा विषाणु मे सुस्पष्ट केन्द्रक तथा अन्य झिल्ली युक्त कोशिकांग नहीं पाए जाते तथा यह पूर्णता परजीवी है और जीवित अवस्था मे तभी रहता है जब यह परजीवी पर हो जबकि स्वतंत्र अवस्था मे निर्जीव ही पाया जाता है अर्थात इसे कोशिका ही नहीं माना गया जो  कोशिका सिद्धांत का सबसे बड़ा अपवाद है 


कोशिका के प्रकार –

कोशिका दो प्रकार की होती हैं |

  1. प्रोकैरियोटिक कोशिका
  2. यूकैरियोटिक कोशिका

प्रोकैरियोटिक कोशिका तथा यूकैरियोटिक कोशिका को खोज Dougherty व Allen ने की थी |

प्रोकैरियोटिक कोशिका व  यूकैरियोटिक कोशिका के बीच की कड़ी को मीजोकैरियोटिक कोशिका कहते हैं |मीजोकैरियोटिक कोशिका की खोज Doudge ने की थी |

उदाहरण – डायनोफ्लैजिलेट |

1. प्रोकैरियोटिक कोशिका –

प्रोकैरियोटिक कोशिका में केन्द्रक झिल्ली , केन्द्रक सुविकसित कोशिकांग अनुपस्थित होते हैं | प्रोकैरियोटिक कोशिका की कोशिका भित्ति पेप्टाइडोग्लायकेन या म्युरेन की बनी होती हैं | प्रोकैरियोटिक कोशिका में 70 ‘s’ प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं | कोशिका द्रव्य के सीधे सम्पर्क में DNA तथा RNA रहते हैं | इनके गुणसूत्र में हिस्टोन प्रोटीन का अभाव होता हैं |

उदाहरण – जीवाणु ( Bacteria ) , साइनोबैक्टीरिया अर्कीबैक्टीरिया , विषाणु ( Virus ) , बैक्टीरियोफेज , माइकोप्लाज्मा ( PPLO ) , नील हरित शैवाल ( Blue green algae ) रिकेट्सिया की कोशिकाएं आदि |

2. यूकैरियोटिक कोशिका –

यूकैरियोटिक कोशिका में कोशिका भित्ति ( cell wall ) सेल्युलोस तथा पेक्टोज की बनी होती हैं |
यूकैरियोटिक कोशिका में कोशिका झिल्ली (cell membrane ) , केन्द्रक तथा पूरी तरह से विकसित कोशिकांग उपस्थित होते हैं| यूकैरियोटिक कोशिका में 80′ s ‘ प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं | इनमे DNA तथा RNA कोशिका द्रव्य के सीधे सम्पर्क में नहीं रहते हैं | यूकैरियोटिक कोशिकाओ के गुणसूत्र(chromosome) में हिस्टोन प्रोटीन पायी जाती हैं | जो क्षारीय होती हैं |
उदाहरण – सभी जन्तु कोशिका , प्रोटोजोआ , जीव जन्तु आदि

कोशिका की संरचना

कोशिका की संरचना

कोशिका की बनाबट अत्यधिक जटिल होती हैं | कोशिकाओं में अनेक प्रकार की संरचनाये पायी जाती हैं , जिन्हें कोशिकांग कहते हैं |

कोशिका के भाग –

कोशिका में प्रमुख रूप से तीन भाग पाए जाते हैं –
1. कोशिका भित्ति ( cell wall )
2. जीवद्रव्य ( protoplasm )
3. रसधानियां या रिक्तिकाएं ( Vacuole )

1. कोशिका भित्ति ( Cell wall ) –

पादप कोशिकाओ की सबसे बाहरी कठोर , मजबूत , मोटी तथा छिद्रयुक्त , पारगम्य तथा निर्जीव आवरण को कोशिका भित्ति कहते हैं|

Robert hooke ने कोशिका भित्ति ( Cell wall ) की खोज की थी |

कोशिका भित्ति का निर्माण कोशिका विभाजन ( Cell division ) की अंत्यावस्था ( Telophase ) के समय अंतः प्रद्रव्यी जालिका ( Endoplasmic reticulum ) की छोटी – छोटी नलिकाओं के माध्यम से होता हैं | कोशिका भित्ति पादपों में उपस्थित तथा जन्तुओ में अनुपस्थित होती हैं | पादपो में कोशिका भित्ति सेल्यूलोस तथा पेक्टोस की बनी होती हैं |सामान्यतः बहुत से कवको ( Fungi ) तथा यीस्ट में कोशिका भित्ति काईटिन के द्वारा बनती हैं | तथा शैवालो ( Algae ) में कोशिका भित्ति का निर्माण गैलक्टेन मैंनन ,कैल्सियम कार्बोनेट से बना होता हैं | द्वितीयक कोशिका भित्ति सेल्युलोज पेक्टिन तथा लिग्निन आदि पदार्थो की बनती हैं | त्तृतीयक कोशिका भित्ति का निर्माण जाईलन नामक पदार्थ द्वारा होता हैं | कोशिका भित्ति की सबसे बाहरी प्राथमिक कोशिका भित्ति पतली , कोमल , लोचदार तथा पारगम्य होती हैं | मध्य पटल ( Middle lamella ) का निर्माण कैल्सियम तथा मैग्नीसियम के पेक्टेट्स द्वारा होता हैं |

प्लाज्मा मेम्ब्रेन –

प्लाज्मा मेम्ब्रेन कोशिका के कोशिका द्रव्य और जीवद्रव्य की सबसे बाहरी परत होती हैं | यह कोशिका में प्रवेश करने वाले तथा बाहर निकलने वाले विभिन्न अणुओं तथा आयनों पर नियंत्रण तथा कोशिका द्रव्य में आयनों की सांद्रता को बनाये रखती हैं | प्लाज्मा मेम्ब्रेन जंतु कोशिकाओं में पायी जाने वाली सबसे बाहरी परत तथा पादप कोशिकाओं में पायी जाने वाली दूसरी परत हैं |

प्लाज्मा मेम्ब्रेन के अन्य नाम – प्लाज्मा झिल्ली , जीव कला / कोशिका झिल्ली  ( cell membrane ) , बायोलोजिकल मेम्ब्रेन , प्लाज्मा लेमा , प्लाज्मा जैल , सारकोलेमा , न्यूरोलेमा आदि |

कोशिका झिल्ली लिपिड व प्रोटीन की बनी होने के कारण इसे लाइपोप्रोटीन झिल्ली भी कहते हैं , कुछ कोशिकाओं की कोशिका झिल्ली में कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स भी होते हैं |

जीवद्रव्य ( Protoplasm ) –

जीवद्रव्य सभी सजीव कोशिकाओं में पाया जाता हैं | इसमें पाये जाने वाले समस्त पदार्थ को जीवद्रव्य कहते हैं |

जीवद्रव्य (Protoplasm ) नाम सर्वप्रथम पुरकिन्जे ( 1840) तथा एच. बी. मोहल ( 1846 ) ने दिया था |

जीव में सम्पन्न होने वाली सभी जैविक क्रियाएं जीवद्रव्य में सम्पन्न होती हैं | इसलिए जीवद्रव्य को जीवन का भौतिक आधार ( Physical basis of life ) कहा जाता हैं | जीवद्रव्य का Ph = 6.5 – 7.0 होती हैं | जीवद्रव्य में वृध्दि तथा विभाजन पाए जाते हैं | नया जीवद्रव्य पुराने जीवद्रव्य के अंदर बनता हैं |

जीवद्रव्य के गुण –

जीवद्रव्य ( protoplasm ) के निम्न गुण हैं |

1. भौतिक गुण –

जीवद्रव्य रंगहीन , अर्धपारदर्शक तथा अर्धतरल पदार्थ हैं | जीवद्रव्य में 60 – 70% जल पाया जाता हैं | जिसमे अकार्बनिक तथा कार्बनिक पदार्थ मिले रहते हैं | जीवद्रव्य में विभिन्न पदार्थ अणु व आयन के रूप में मिले रहते हैं इनके मिश्रण को क्रिस्टलीय घोल कहते हैं | जीवद्रव्य में ब्राउनी गति पायी जाती हैं |

2. रासायनिक गुण –

जीवद्रव्य के जटिल मिश्रण में लगभग 30 तत्व जिनमे मुख्य रूप से ऑक्सीजन , कार्बन हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन क्रमशः 62% , 20% , 10% ,8% के अनुपात में होते हैं तथा शेष सोडियम , पोटेशियम , कैल्सियम , लोहा तथा सल्फेट इत्यादि पदार्थ सूक्ष्म मात्रा में होते हैं |

रसधानियाँ या रिक्तिकाएं ( Vacuole ) –

रिक्तिकाएं पादप कोशिकाओं में पायी जाती हैं | कोशिका द्रव्य में गोल , खोखले तथा झिल्ली द्वारा घिरे स्थान को रिक्तिका या रसधानी कहते हैं

Dujardin ( 1841 ) ने रिक्तिका नाम दिया |

संकुचनशीलधानी ( Contractile vacuoles ) की खोज Spallanzani ( 1776 ) ने प्रोटोज़ोआ में की थी |

रिक्तिकाएं पादप कोशिकाओं में पायी जाती तथा जन्तुं कोशिका में अपेक्षाकृत कम पायी जाती हैं | रिक्तिका का निर्माण आंतरद्रव्यजालिका ( Smooth endoplasmic reticulum – SER ) से होता हैं | रिक्तिका एक नॉनसाइटोप्लाज्मिक सैक हैं | पुष्प व फलों के रंग रिक्तिकाओं में एन्थोसाइनिन पाए जाने के कारण होता हैं |

रिक्तिकाओं के प्रकार –

रिक्तिकाएं चार प्रकार की होती हैं |

1. रसधानी ( Sap vacuoles )

2. संकुचनशीलधानी ( Contractile vacuoles )

3. पाचन धानी ( Food vacuole )

4.  गैस धानी ( Gas and air vacuoles / pseudovacuoles )

रिक्तिका के कार्य –

1. रिक्तिका कोशिका के कोशिका द्रव्य में पाए जाने वाले कोलॉइडी मैट्रिक्स को यांत्रिक बल प्रदान करती हैं |

2. रिक्तिका परासरण नियमन (Osmo regulation ) में मद्त करती हैं | अकोशकीय जीवों में |

3. रिक्तिका प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में भाग लेती हैं जैसे – CAM ( क्रेस्यूलियन ऐसिडमेटा बोलिज्म ) पौधे |

4. रिक्तिका उच्च श्रेणी के पौधों में स्फीती दाब ( Turgor pressor ) को नियंत्रित करती तथा कोशिका को स्फीत ( Turgid ) बनाये रखती हैं |