About

Ad

script data-ad-client="ca-pub-7106351896931739" async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js">
script data-ad-client="ca-pub-7106351896931739" async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js">

विकासखंड - नैनपुर, ज़िला - मंडला (मध्य प्रदेश)

मंगलवार, 5 अगस्त 2025

नियंत्रण एवं समन्वय

नियंत्रण और समन्वय एक जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा सभी जीवधारी अपने शरीर की विभिन्न गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं और बाहरी वातावरण में होने वाले बदलावों के प्रति प्रतिक्रिया देते हैं। 

यह प्रक्रिया शरीर के सभी अंगों और प्रणालियों के बीच तालमेल बनाए रखने में मदद करती है, जिससे वे कुशलतापूर्वक कार्य कर सकें। 

यह प्रक्रिया जीवों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें बाहरी उद्दीपनों (जैसे गर्मी, ठंड, प्रकाश, ध्वनि) का पता लगाने और उनके अनुसार प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाती है, जिससे उनका अस्तित्व बना रहता है। 

जंतुओं में समन्वय और नियंत्रण:
जंतुओं में, यह प्रक्रिया मुख्य रूप से दो प्रणालियों द्वारा की जाती है: 

तंत्रिका तंत्र (Nervous System):
यह सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक बहुत तेजी से पहुँचाने का काम करता है। 
इसमें मस्तिष्क, मेरु-रज्जु और तंत्रिकाएँ शामिल होती हैं। यह बाहरी उद्दीपनों को ग्रहण करता है, उनका विश्लेषण करता है और उसके अनुसार शरीर के विभिन्न हिस्सों को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए निर्देश देता है। 

उदाहरण के लिए, जब हम किसी गर्म वस्तु को छूते हैं, तो तंत्रिका तंत्र तुरंत हाथ को हटाने का निर्देश देता है।

अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System):
यह शरीर में हॉर्मोन नामक रासायनिक संदेशवाहकों (chemical messengers) को स्रावित करता है।
हॉर्मोन रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचते हैं और धीरे-धीरे कार्य करते हैं।

यह वृद्धि, विकास, उपापचय और प्रजनन जैसी धीमी और दीर्घकालिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। 

उदाहरण के लिए, पिट्यूटरी ग्रंथि से निकलने वाला वृद्धि हॉर्मोन शरीर की वृद्धि को नियंत्रित करता है। 

पौधों में समन्वय और नियंत्रण:
पौधों में तंत्रिका तंत्र और पेशियाँ नहीं होतीं, इसलिए वे केवल रासायनिक समन्वय पर निर्भर रहते हैं। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से पादप हॉर्मोन (Plant Hormones) या फाइटोहॉर्मोन द्वारा पूरी होती है। ये हॉर्मोन पौधों में विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं, 

जैसे:
वृद्धि: ऑक्सिन, जिबरेलिन और साइटोकाइनिन जैसे हॉर्मोन तने, जड़ और पत्तियों की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं।

प्रकाशानुवर्तन
पौधे के तने का प्रकाश की ओर मुड़ना।

गुरुत्वानुवर्तन
पौधे की जड़ों का गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ना। * पत्तियों का झड़ना: एब्सिसिक एसिड जैसे हॉर्मोन पत्तियों और फलों के गिरने को प्रेरित करते हैं।

फूलों का खिलना: 
कुछ हॉर्मोन फूलों के खिलने और बीज बनने को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार, पौधों में भी उनके बाहरी वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया देने और अपनी जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करने की व्यवस्था होती है।

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें