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विकासखंड - नैनपुर, ज़िला - मंडला (मध्य प्रदेश)

बुधवार, 23 दिसंबर 2020

प्रथम कोटि अभिक्रिया , FIRST ORDER REACTION

 


प्रथम कोटि अभिक्रिया :

वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया की दर अभिकारक पदार्थ की सान्द्रता की प्रथम घात
 के समानुपाती होती हैै , प्रथम कोटि अभिक्रिया
 ( first order reaction ) कहलाती है |

    A           →          उत्पाद

a mole             0    T = 0 sec
(a-x) mole     x mole T = t sec

माना किसी अभिकारक पदार्थ की प्रारम्भिक सान्द्रता (a)  
मोल है  तथा t sec  पश्चात् इसके x mole वियोजित हो 
जाते है  तब प्रथम कोटि  की अभिक्रिया के लिए ,

        dx/dt  ∝   [A] ¹

        dx/dt  =  k  [A]¹



जहाँ , k =  प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक

               dx/dt  =  k ( a - x )

         dx/( a -x) =  k dt


दोनो पक्षोँ  का समाकलन करने पर ,

        ∫ dx / ( a - x ) =  ∫ k dt

- log e ( a - x ) = kt + I (आई)  ......(समीकरण 1 )

जहाँ I = समाकलन नियतांक ( Integration constant )

प्रारम्भ में , जब t = 0 तब  x = 0

उपरोक्त मान समीकरण (1) में रखने पर

- log e ( a - 0 )=k × 0 + I

- log e a = I

 ⇒    I = - log e a

I का  मान समीकरण (1) में रखने पर,

- log e (a - x) = kt - log e a

log e a - log e (a - x) = kt

log e (a / a-x) = kt

k = 1 / t  log e (a / a - x)

k = 2.303 / t  × log 10 (a / a - x)
........(समीकरण 2 )

 

उदाहरण :-
1. एस्टर का जल-अपघटन :-

CH3COOC2H5 + H2O  →

CH3COOH + C2H5OH

यह अभिक्रिया प्रथम कोटि की अभिक्रिया है क्योकिं अभिक्रिया की दर केवल ऐथिल ऐसिटेट की सान्द्रता पर निर्भर करती है |

शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए व्यंजक व्युत्पत्ति



वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमेँ अभिक्रिया की दर अभिकारक पदार्थोँ के सक्रिय द्रव्यमानोँ की शून्य घात के समानुपाती होती हैँ , शून्य कोटि अभिक्रिया कहलाती हैँ ।

माना किसी पदार्थ की सान्द्रता a mole है ,
 तथा t sec पश्चात् पदार्थ के  x mole वियोजित हो जाता है । तब -
अभिक्रिया की दर ∝ [A]

       dx/dt  ∝   [A]

शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए  

dx/dt  =    k [A]

जहाँ , k = शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक

         dx/dt = k (a - x) 0

        dx/dt    =   k

       dx = k  dt

दोनो पक्षोँ  का समाकलन करने पर ,

           ∫ dx=  ∫ k dt

              x = kt +I
जहाँ I =समाकलन नियतांक
प्रारम्भ मेँ
जब t = 0 sec

तब  x = 0

उपरोक्त 0 = k  × 0 + I   ⇒   I = 0

I का मान समीकरण (1) मेँ रखने पर

x  = kt

k  =  x/t

शून्य कोटि अभिक्रियाओँ के अभिलक्षण :-

1. शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए अभिक्रिया के वेग
स्थिराँक का मात्रक सान्द्रण समय KI-¹ अर्थात्
मोल लीटर KI-¹   सेकण्ड KI-¹  होता है ।
2. इस अभिक्रिया के लिए सान्द्रता तथा अभिक्रिया की
दर के बीच ग्राफ खीँचने तर एक सरल रेखा प्राप्त होती है ,
अर्थात अभिक्रिया की दर पदार्थ की सान्द्रता पर निर्भर नहीँ करता है |


x/dt   का t के विपरीत आलेख समय अक्ष के समान्तर
एक सरल रेखा होती है ।

3. अभिक्रिया के किसी भी आंशिक परिवर्तन के
पूर्ण होने मेँ लगा समय प्रारम्भिक सान्द्रता 'a' के अनुक्रमानुपाती होता है ।
5. शून्य कोटि अभिक्रियाओँ के पूर्ण होने मेँ एक निश्चित समय लगता है ।

* अर्द्धआयु काल :-
 
वह समय जिसमेँ कोई अभिकारी पदार्थ अपनी
प्रारम्भिक मात्रा का आधा शेष रह जाता है
,वह उस पदार्थ का अर्द्धआयु काल कहलाता है ।
जब T = t½

तब x = a/2

उपरोक्त मान समीकरण (2) मेँ रखने पर ,

   k  =  a /2 /t½
         
t½  =  a / 2k  (   ∵ 2 तथा k = नियतांक )

रविवार, 13 दिसंबर 2020

Students of class 12th are advised to do not study given units of Physics



 Syllabus of Physics has been reduced for this year due to covid-19. 

Suggest you to don't study these units of book.


Unit 3: चुंबकत्व एवं द्रव्य (Meganetism & Metter)


 Unit 6:किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र (Ray optics and optical Instruments)


Unit 8: नाभिक (Nuclei)



जीव विज्ञान १२वीं में 3 अध्याय कम किए गए हैं, कृपया इनका अध्ययन न करें

१२ वीं के छात्र जीव विज्ञान में ये 3 यूनिट्स का अध्ययन न करें।

Unit : 9 खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति
Unit 14: परितंत्र
Unit 16: पर्यावरण के मुद्दे

रसायन विज्ञान १२वीं में दो अध्याय कम किए गए हैं, कृपया इनका अध्ययन न करें

१२ वीं के छात्र रसायन विज्ञान में ये २ यूनिट्स का अध्ययन न करें।

1. Unit 6: General principle and process of isolation of elements

2. Unit 15: Polymers

मंगलवार, 24 नवंबर 2020

शुष्क सेल, चित्र और कार्यविधि


 शुष्क सेल या शुष्क बैटरी शुष्क सेल का एनोड और कैथोउ का कार्य चित्र, किस धातु का बना होता है : वें बैट्री या सेल जिनमें तुलनात्मक रूप से बहुत कम नमी होती है अर्थात इनमें विद्युत अपघट्य पदार्थ में नमी बहुत कम होती है और इसलिए ही इन सेलों या बैटरीयों को शुष्क सेल कहा जाता है। अर्थात वे सेल जिनमें अन्य सेलों की तुलना में विद्युत अपघटय में नमी बहुत कम होती है उसे शुष्क सेल कहते हैं, इसमें विद्युत अपघट्य पदार्थ को पेरट के रूप में काम में लिया जाता है।

शुष्क सेल बैटरी कैसे कार्य करता है (How Do Dry Cell Batteries work2)

शुष्क सेल बैट्री में रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करके विद्युत धारा उत्पन्न की जाती है, सामान्यतया इन सेलों में जिंक और कार्बन या जिंकऔर मैंगनीज डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है।

इन पदार्थों को बैटरी के विद्युत अपघट्य में मिलाया जाता है अर्थात इन दोनों को पेस्ट बनाकर विद्युत अपघट्य पदार्थ के रूप में काम में लिया जाता है, ये पदार्थ आपस में रासायनिक क्रिया करता है अर्थात कार्बन पा मैंगनीज डाइऑक्साइड पदार्थ जिंक के साथ किया करता है और इस रासायनिक अभिक्रिया द्वारा रासायनिक पदार्थ विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है जिससे विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है।

इस विद्युत धारा को बैटरी के धन और ऋण सिरों अर्थात इलेक्ट्रोड के द्वारा प्राप्त कर लिया जाता है।


शुष्क सेल बैटरी की संरचना

शुष्क सेल लेक्लांश सैल पर आधारित होता है, यह सेल 2n (जिंक) धातु का गोलाकार सिलिंडर का बना होता है यह एनोड की तरह कार्य करता है। इस सेल के मध्य में ग्रेफाईट की छड़ लगी हुई रहती हैं जो कैधोड का कार्य करती है। अतः इस प्रकार के सेल में zn पदार्थ को एनोड की तरह काम में लिया जाता है और प्रेफाईट पदार्थ को कैचोड की तरह काम में लिया जाता है।

ग्रेफाईट की छड के पास कार्बन (Carbon) और MnO के मिश्रण का गिला पेस्ट भरा हुआ रहता है तथा जिंक धातु के गोलाकार पात्र

में NHACI और Zncl का गिला पेस्ट भरा हुआ रहता है।

इस सेल को चारों तरफ से विद्युत रोधी बनाने के लिए मोटे कागज़ का आवरण लगाया जाता है। जब इसे सेल को विद्युत परिपथ में जोड़ा जाता है।

इलेक्ट्रॉन त्यागकर Zn - में परिवर्तित हो जाता है, ये इलेक्ट्रॉन बाह्य परिपथ से होते हुए कैथोड पर पहुँचते हैं और कैथोड द्वारा ग्रहण कर लिए जाते है, कैथोड पर उपस्थित NH| आपन इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करके उदासीन हो जाते हैं और यहाँ


तब Zn,


पर MnO2 का अपचयन हो जाता है।


ऐनोड पर क्रिया निम्न अभिक्रिया होती है


Zn - Zn* + 2e


कैथोड़ पर क्रिया निम्न होती है


2 Oz 2NH4 + 2e - 2MNO(OH) + 2NH


इस क्रिया में बनी अमोनिया गैस 2n2* आयन से क्रिया कर लेती है तथा [Zn(NHIJAP* आयन बना देती है।

शून्य कोटि की अभिक्रिया किसे कहते है?

 


शून्य कोटि अभिक्रिया

वे रासायनिक अभिक्रियाऐँ जिनमेँ समय के साथ-साथ
 अभिकारक पदार्थ की सान्द्रता मेँ कोई परिवर्तन नहीँ होता है ।
वे अभिक्रयाएँ शून्य कोटि अभिक्रियाएँ कहलाती हैँ ।
या
वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमेँ अभिक्रिया की दर अभिकारक पदार्थोँ के सक्रिय द्रव्यमानोँ की शून्य घात के समानुपाती होती हैँ , शून्य कोटि अभिक्रिया कहलाती हैँ ।

माना किसी पदार्थ की सान्द्रता a mole है ,
 तथा t sec पश्चात् पदार्थ के  x mole वियोजित हो जाता है । तब -
अभिक्रिया की दर ∝ [A]

       dx/dt  ∝   [A]

शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए  

dx/dt  =    k [A]

जहाँ , k = शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक

         dx/dt = k (a - x) 0

        dx/dt    =   k

       dx = k  dt

दोनो पक्षोँ  का समाकलन करने पर ,

           ∫ dx=  ∫ k dt

              x = kt +I
जहाँ I =समाकलन नियतांक
प्रारम्भ मेँ
जब t = 0 sec

तब  x = 0

उपरोक्त 0 = k  × 0 + I   ⇒   I = 0

I का मान समीकरण (1) मेँ रखने पर

x  = kt

k  =  x/t

शून्य कोटि अभिक्रियाओँ के अभिलक्षण :-

1. शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए अभिक्रिया के वेग
स्थिराँक का मात्रक सान्द्रण समय KI-¹ अर्थात्
मोल लीटर KI-¹   सेकण्ड KI-¹  होता है ।
2. इस अभिक्रिया के लिए सान्द्रता तथा अभिक्रिया की
दर के बीच ग्राफ खीँचने तर एक सरल रेखा प्राप्त होती है ,
अर्थात अभिक्रिया की दर पदार्थ की सान्द्रता पर निर्भर नहीँ करता है 
|x/dt   का t के विपरीत आलेख समय अक्ष के समान्तर
एक सरल रेखा होती है ।

3. अभिक्रिया के किसी भी आंशिक परिवर्तन के
पूर्ण होने मेँ लगा समय प्रारम्भिक सान्द्रता 'a' के अनुक्रमानुपाती होता है ।
5. शून्य कोटि अभिक्रियाओँ के पूर्ण होने मेँ एक निश्चित समय लगता है ।

* अर्द्धआयु काल :-
 
वह समय जिसमेँ कोई अभिकारी पदार्थ अपनी
प्रारम्भिक मात्रा का आधा शेष रह जाता है
,वह उस पदार्थ का अर्द्धआयु काल कहलाता है ।
जब T = t½

तब x = a/2

उपरोक्त मान समीकरण (2) मेँ रखने पर ,

   k  =  a /2 /t½
         
t½  =  a / 2k  (   ∵ 2 तथा k = नियतांक )

t½  ∝ a

दो भाईयों से पता चली थी बंदर से इंसान बनने की बात


 पृथ्वी पर जीवन कैसे पनपा? और इंसान कैसे आए? इसको लेकर आज भी कोई एकमत राय नहीं है। लेकिन, हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि हमारे पूर्वज बंदर थे और समय के साथ धीरे-धीरे हमने खुद को विकसित किया। लेकिन हम बंदर से इंसान कैसे बने? इस बात का पता लगाया था चार्ल्स डार्विन ने।


डार्विन की किताब 'ऑन द ओरिजन ऑफ स्पेशीज बाय मीन्स ऑफ नेचुरल सिलेक्शन' 24 नवंबर 1859 को ही पब्लिश हुई थी। इस किताब में एक चैप्टर था, 'थ्योरी ऑफ इवोल्यूशन'। इसी में बताया गया था कैसे हम बंदर से इंसान बने?

चार्ल्स डार्विन का मानना था कि हम सभी के पूर्वज एक हैं। उनकी थ्योरी थी कि हमारे पूर्वज बंदर थे। लेकिन कुछ बंदर अलग जगह अलग तरह से रहने लगे, इस कारण धीरे-धीरे जरूरतों के अनुसार उनमें बदलाव आने शुरू हो गए। उनमें आए बदलाव उनके आगे की पीढ़ी में दिखने लगे।


उन्होंने समझाया था कि ओरैंगुटैन (बंदरों की एक प्रजाति) का एक बेटा पेड़ पर, तो दूसरा जमीन पर रहने लगा। जमीन पर रहने वाले बेटे ने खुद को जिंदा रखने के लिए नई कलाएं सीखीं । उसने खड़ा होना, दो पैरों पर चलना, दो हाथों का उपयोग करना सीखा।

पेट भरने के लिए शिकार करना और खेती करना सीखा। इस तरह ओरैंगुटैन का एक बेटा बंदर से इंसान बन गया। हालांकि,ये
बदलाव एक-दो सालों में नहीं आया बल्कि इसके लिए करोड़ों साल लग गए।

सोमवार, 23 नवंबर 2020

वान्ट हाफ गुणांक किसे कहते हैं ?

 


वान्ट हाफ गुणांक : (Van‘t Hoff factor )

असामान्य मानो की व्याख्या करने के लिए वान्टहॉफ ने एक नए गुणांक का समावेश किया जिसे वान्टहॉफ गुणांक कहते है इसे i से व्यक्त करते है।

विलेय के प्रेक्षित मोल तथा सैद्धांतिक मोल के अनुपात को वान्टहॉफ गुणांक कहते है।

वान्टहॉफ गुणांक (i ) = विलेय के प्रेक्षित मोल / विलेय के सैद्धांतिक मोल

i  = विलेय के प्रेक्षित अणु संख्यक गुण / विलेय के सैद्धांतिक अणु संख्य गुण

i   =  (ΔP/P10)/( ΔP/P10)t

i   = (ΔTb)प्रेक्षित /( ΔTb)सैधांतिक

i   =  (ΔT)/( ΔTf)t

i   = Π0/ Πt

अणु संख्य गुणों के सभी मान विलेय के अणुभार के व्युत्क्रमानुपाती होते है।

अतः

i = विलेय के सैद्धांतिक अणुभार / विलेय का प्रेक्षित अणुभार

फ्रेन्कत दोष एवं शाटकी दोष में अन्तर लिखिए



Schottky दोष और Frenkel दोष के बीच महत्वपूर्ण अंतर यह है कि Schottky दोष एक क्रिस्टल के घनत्व को कम करता है जबकि Frenkel दोष एक क्रिस्टल के घनत्व को प्रभावित नहीं करता है। उपरोक्त मुख्य अंतर के अलावा, Schottky दोष और Frenkel दोष के बीच एक और महत्वपूर्ण अंतर यह है कि Schottky दोष क्रिस्टल के द्रव्यमान में कमी का कारण बनता है जबकि Frenkel दोष क्रिस्टल के द्रव्यमान को प्रभावित नहीं करता है।

क्रिस्टल जाली शब्द एक क्रिस्टल के परमाणुओं की सममित व्यवस्था का वर्णन करता है। Schottky दोष और Frenkel दोष बिंदु दोष के दो रूप हैं जो एक क्रिस्टल जाली में होते हैं। एक बिंदु दोष एक खाली बिंदु है जो क्रिस्टल जाली से एक परमाणु के नुकसान के कारण बनता है। ये दोष क्रिस्टल लैटिस की अनियमितता का कारण बनते हैं।

Schottky दोष क्या है?


Schottky दोष बिंदु दोष का एक रूप है जो क्रिस्टल जाली के स्टोइकोमेट्रिक इकाइयों में एक परमाणु के नुकसान के कारण बनता है। इस बिंदु दोष को वैज्ञानिक वाल्टर एच। शोट्स्की के बाद इसका नाम मिला। हम इस दोष को आयनिक या नॉनऑनिक क्रिस्टल में देख सकते हैं। यह दोष तब उत्पन्न होता है जब एक बिल्डिंग ब्लॉक क्रिस्टल जाली को छोड़ देता है।

यद्यपि जाली एक परमाणु को खो देती है, लेकिन यह जाली के चार्ज संतुलन को प्रभावित नहीं करती है क्योंकि परमाणु जाली के एक स्टोइकोमेट्रिक यूनिट को छोड़ देते हैं। एक स्टोइकोमेट्रिक यूनिट में बराबर अनुपात में समान रूप से आवेशित परमाणु होते हैं।

जब यह दोष होता है, तो यह क्रिस्टल जाली के घनत्व को कम करता है। आयनिक यौगिकों में बिंदु दोषों का यह रूप आम है। जब यह nonionic क्रिस्टल में होता है, तो हम इसे एक रिक्ति दोष कहते हैं। ज्यादातर बार, यह दोष क्रिस्टल लट्टुओं में होता है जिनमें लगभग समान आकार के परमाणु होते हैं। Ex: NaCl जाली, केबीआर जाली आदि।


फ्रेनकेल दोष क्या है?


फ्रेनकेल दोष बिंदु दोष का एक रूप है जिसमें दोष क्रिस्टल जाली से एक परमाणु या छोटे आयन के नुकसान के कारण होता है। यह नुकसान जाली में एक खाली बिंदु बनाता है। इस दोष के पर्यायवाची हैं फ्रेनकेल विकार और फ्रेनकेल जोड़ी। वैज्ञानिक याकोव फ्रेनकेल के बाद इस दोष को इसका नाम मिला।

यदि एक छोटा आयन क्रिस्टल जाली को छोड़ देता है, तो यह एक धनायन (धनात्मक आवेशित आयन) है। यह आयन रिक्त स्थान के पास एक स्थान पर रहता है। इसलिए, यह दोष क्रिस्टल जाली के घनत्व को प्रभावित नहीं करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि परमाणु या आयन पूरी तरह से जाली को नहीं छोड़ते हैं। आयनिक अक्षांशों में बिंदु दोषों का यह रूप आम है। शोट्स्की दोष के विपरीत, यह दोष विभिन्न आकारों वाले परमाणुओं या आयनों के साथ अक्षांशों में होता है।

Schottky Defect और Frenkel Defect में क्या अंतर है?

Schottky दोष बिंदु दोष का एक रूप है जो क्रिस्टल जाली के स्टोइकोमेट्रिक इकाइयों में एक परमाणु के नुकसान के कारण बनता है। फ्रेनकेल दोष बिंदु दोष का एक रूप है जिसमें दोष क्रिस्टल जाली से एक परमाणु या छोटे आयन के नुकसान के कारण होता है। Schottky दोष क्रिस्टल जाली के घनत्व को कम करता है जबकि Frenkel दोष क्रिस्टल जाली के घनत्व को प्रभावित नहीं करता है।

सारांश - स्कॉटकी दोष बनाम फ्रेनकेल दोष

क्रिस्टल दोषों में बिंदु दोष दोष होते हैं जो जाली से परमाणुओं या आयनों के नुकसान के कारण होते हैं और इस प्रकार, खाली बिंदु बनाते हैं। Schottky दोष और Frenkel दोष बिंदु दोष के दो रूप हैं। शोट्की दोष और फ्रेनकेल दोष के बीच अंतर यह है कि शोट्की दोष एक क्रिस्टल के घनत्व को कम करता है जबकि फ्रेंकेल दोष क्रिस्टल के घनत्व को प्रभावित नहीं करता है।


मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने में उपयोग किये जाने वाले मधुरकों के नाम लिखिए।



 आज के समय में मधुमेह यानी डायबिटीज होना आम बात है। जब ब्लड में शुगर का लेवल ज्यादा होता है तो ये बीमारी होती है। ऐसे में बार-बार प्यास लगने, पेशाब आने और ज्यादा भूख लगने जैसी समस्या होनी शुरू हो जाती है। इस बीमारी के चलते व्यक्ति का अग्न्याशय सही से इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है। वहीं, अगर इस तरह के समस्या ज्यादा समय तक रहती है तो रोगी कई तरह की बीमारियों को न्योता दे सकता है।


चिकित्सकों के अनुसार मधुमेह के रोगियों के लिए शारीरिक गतिविधि और पोषण के साथ ही एक सेहतमंद रहन-सहन का होना खास हिस्सा है। इसके अलावा रोगी स्वस्थ खान-पान अपनाकर और सक्रिय रहकर खुद-ब-खुद रक्त ग्लूकोज लेवल को लक्ष्य सीमा में रख सकता है। इसके लिए आपको शारीरिक गतिविधियों, सेहतमंद भोजन और मधुमेह की दवाइयों में ठीक संतुलन बनाने की जरुरत है। मधुमेह रोगी कब, कितना और क्या खाता है, ये सभी उनके रक्त ग्लूकोज को लेवल में रखने के लिए अपनी खास भूमिका निभाते हैं।

मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने में उपयोग किये जाने वाले मधुरकों के नाम।

1. सेकेरीन

2. एस्पार्टेम

3. सक्रोलोस

वेग स्थिरांक पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है? ताप के इस प्रभाव को मात्रात्मक रूप में कैसे प्रदर्शित कर सकते हैं?

 


अभिक्रिया का वेग स्थिरांक सदैव ताप बढ़ाने पर बढ़ता है। ताप में 10°C की वृद्धि पर इसका मान लगभग दोगुना हो जाता है।


 इसे मात्रात्मक रूप में निम्न प्रकार प्रदर्शित करते हैं – 

k = Ae-Ea/RT  जहाँ = ताप T पर वेग स्थिरांक है, A= आवृत्ति गुणांक तथा E,= सक्रियण ऊर्जा

किसी विलयन की चालकता तनुता के साथ क्यों घटती है?

 


विलयन की चालकता, विलयन के एकांक आयतन में उपस्थित आयनों की चालकता होती है। तनुकरण पर प्रति एकांक आयतन आयनों की संख्या घटती है, अत: चालकता भी घट जाती है।



गुरुवार, 29 अक्टूबर 2020

मानव प्रजनन तंत्र (Human Reproductive System )

 

मानव प्रजनन तंत्र Human Reproductive System

जिस प्रक्रम द्वारा जीव अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं, उसे प्रजनन (Reproduction) कहते हैं। प्रजनन जीवों का सर्वप्रमुख लक्षण है। इस पृथ्वी पर जीव-जातियों की सततता प्रजनन के फलस्वरूप ही संभव हो पायी है। इस प्रकार प्रजनन वह प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपनी ही जैसी अन्य उर्वर सन्तानों की उत्पत्ति करता है और इस प्रकार अपनी संख्या में वृद्धि कर अपनी जाति के अस्तित्व को बराबर बनाए रखकर उसे विलुप्त होने से बचाता है। जीवों के प्रजनन में भाग लेने वाले अंगों प्रजनन अंग (Reproductive organs) तथा एक जीव के सभी प्रजनन अंगों को सम्मिलित रूप से प्रजनन तंत्र (Reproductive system) कहते हैं।

मानव प्रजनन तंत्र (Human reproductive system): मानव एकलिंगी (Unisexual) प्राणी है, अर्थात् नर और मादा लिंग अलग-अलग जीवों में पाये जाते हैं। जो जीव केवल शुक्राणु उत्पन्न करते हैं उसे नर कहते हैं। जिन जीवों से केवल अण्डाणु की उत्पत्ति होती है, उन्हें मादा कहते हैं। मानव में प्रजनन तंत्र अन्य जन्तुओं की अपेक्षा बहुत अधिक विकसित और जटिल होता है। मानव में अपडे का निषेचन (Fertilization) फैलोपियन नलिका (Fallopian tube) तथा भ्रूणीय तथा (Embryonic development) गर्भाशय (Uterus) में होता है। मानव जरायुज (viviparous) होते हैं अर्थात् ये सीधे शिशु को जन्म देते हैं। मानव में जनन अंग मादा में 12 से 13 वर्ष की उम्र में तथा नर में 15 से 18 वर्ष की उम्र में प्रायः क्रियाशील हो जाते हैं। प्रजनन अंग भी कुछ हार्मोन (Hormone) का स्राव (secretion) करते हैं जो शरीर में अनेक प्रकार के परिवर्तन लाते हैं। ऐसे परिवर्तन मादा में प्रायः वक्ष तथा जनन अंगों पर बाल उगने तथा नर में दाढ़ी एवं मूंछ आने से परिलक्षित होता है। मानव में नर तथा मादा प्रजनन अंग पूर्णतया अलग अलग होते हैं।

रासायनिक आबंध ( Chemical Bonding)

 


किसी अणु में दो या दो से अधिक परमाणु जिस बल के द्वारा एक दूसरे से बंधे होते हैं उसे रासायनिक आबन्ध (केमिकल बॉण्ड) कहते हैं। ये आबन्ध रासायनिक संयोग के बाद बनते हैं तथा परमाणु अपने से सबसे पास वाली निष्क्रिय गैस का इलेक्ट्रान विन्यास प्राप्त कर लेते हैं। [1]





दूसरे शब्दों में, रासायनिक आबन्ध वह परिघटना है जिसमें दो या दो से अधिक अणु या परमाणु एक दूसरे से आकर्षित होकर और जुड़कर एक नया अणु या आयन बनाते हैं (एक विशेष प्रकार के बन्धन 'धात्विक बन्धन' में यह प्रक्रिया भिन्न होती है)। यह प्रक्रिया सूक्ष्म स्तर पर होती है, लेकिन इसके परिणाम का स्थूल रूप में अवलोकन किया जा सकता है, क्योंकि यही प्रक्रिया अनेकानेक अणुओं और परमाणुओं के साथ होती है। गैस में ये नये अणु स्वतन्त्र रूप से मौजू़द रहते हैं, द्रव में अणु या आयन ढीले तौर पर जुडे रहते हैं और ठोस में ये एक आवर्ती (दुहराव वाले) ढाँचे में एक दूसरे से स्थिरता से जुड़े रहते हैं।

आबंध के प्रकार 

सामान्यतः रासायनिक आबन्ध को तीन भागों में विभाजित किया जाता है-

1. आयनिक बन्ध- यह बन्ध आयनों के मध्य आकर्षण से बनता है।

2. सहसंयोजक आबन्ध - इलेक्ट्रॉन के समान साझा से बनता है।

3. उपसहसंयोजक आबन्ध - इलेक्ट्रॉन के असमान साझेदारी से बनता है।

सोमवार, 14 सितंबर 2020

अभिक्रिया की दर (Rate of reaction)

 अभिक्रिया की दर (reaction rate या rate of reaction) का मतलब यह है कि किसी दी हुई रासायनिक अभिक्रिया में किसी अभिकारक या उत्पाद की मात्रा कितना धीमे या कितनी तेजी से बदल रही है।







लोहे पर जंग लगना - कम अभिक्रिया दर वाली रासायनिक अभिक्रिया है






लकड़ी का जलना - तीव्र अभिक्रिया दर वाली रासायनिक अभिक्रिया


भौतिक रसायन के अन्तर्गत रासायनिक गतिकी (Chemical kinetics) में अभिक्रिया की दर का अध्ययन किया जाता है। 'अभिक्रिया की दर' का रासायनिक इंजीनियरी एवं अन्य रासायनिक विधाओं में बहुत महत्व है।

'अभिक्रिया की दर' की औपचारिक परिभाषा: इकाई समय में अभिकारकों या उत्पादों की सांद्रता में परिवर्तन अभिक्रिया की दर या वेग कहलाती है।




"....कृपया आप अपने बहुमूल्य सुझाव या प्रश्न नीचे दिए हुए  टिप्पड़ी  बॉक्स (Comment Box)में प्रविष्ट करें, धन्यवाद...."

ऑफबाऊ सिद्धान्त , ऑफबाउ का नियम (Aufbau Principle)



 ऑफबाऊ सिद्धान्त , ऑफबाउ का नियम :  इस नियम के अनुसार इलेक्ट्रॉन सबसे पहले उन उपकोशों या कोशों में होता है जिनका ऊर्जा स्तर कम होता है।

अत: यह सिद्धांत बताता है कि इलेक्ट्रॉन का वितरण कक्षा या उपकक्षा के ऊर्जा स्तर के बढ़ते हुए क्रम में होता है।

अत: स्पष्ट है कि यह नियम यह बताता है कि कोश या उपकोश में इलेक्ट्रॉन का प्रवेश किस बात पर निर्भर करता है और पहले कौनसे ऊर्जा स्तर मे इलेक्ट्रान भरा जायेगा या कक्षा या उपकक्षा में इलेक्ट्रान भरते समय किस बात का ध्यान रखना आवश्यक है।

अत: जब परमाणु में कोई इलेक्ट्रान नाभिक के चक्कर लगा रहा है तो इलेक्ट्रान पहले निम्न ऊर्जा स्तर कक्षा में जाता है या भरा जाता है उसके बाद वह इलेक्ट्रान उच्च ऊर्जा स्तर कक्षा में जाता है या भरा जाता है।

इस नियम को इस प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है कि जब किसी एक नए इलेक्ट्रान को किसी खाली उपकोश में भरा जाना है तो यह उस खाली उपकोश में भरा जायेगा जिसके लिए n + l का मान न्यूनतम होगा और (n+l) के बढ़ते क्रम में इलेक्ट्रान भरा जाता है।

यदि किन्ही दो उपकोश के लिए n + l का मान समान हो तो पहले इलेक्ट्रान उस उपकोश में भरा जायेगा जिसके लिए n का मान कम है।

नोट : कुछ पदार्थ या परमाणु ऐसे होते है जिनमे ऑफबाऊ सिद्धान्त की पालना नहीं होती है या कुछ अलग तरह से इलेक्ट्रान उपकोश में भरे जाते है ये परमाणु Cr , Cu , Ag , Au आदि है।  इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कुछ अलग तरीके से भरा जाता है।

ऑफबाऊ सिद्धान्त के अनुसार इलेक्ट्रान के भरने का क्रम ऊर्जा स्तर का बढ़ता क्रम होता है जो निम्न प्रकार है अर्थात इलेक्ट्रान को निम्न क्रम में भरा जाता है –

1s < 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 3d < 4p < 5s < 4d < 5p < 6s < 4f <5d < 6p < 7s < 5f < 6d <7p………आदि .




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रविवार, 13 सितंबर 2020

क्या आप सेहत से जुड़ी बातों को मजाक समझते हैं ?



 कहीं आप भी उन लोगों में से तो नहीं जिन्हें सेहत के सच के बारे में पता तो है, लेकिन वे उसे मानते नहीं। नीचे दिए सवालों के जवाब देकर खुद परख लें?

क्या आप सेहत से जुड़ी बातों को मजाक समझते हैं ?

आप अपना अच्छा-बुरा सब जानते हैं, इसके बावजूद भी गलतियां करते हैं। कहीं आप भी उन लोगों में से तो नहीं जिन्हें सेहत के सच के बारे में पता तो है, लेकिन वे उसे मानते नहीं। नीचे दिए सवालों के जवाब देकर खुद परख लें?

1. आपको अपनी सेहत और उससे जुड़ी समस्याओं के बारे में लगभग पूरी जानकारी है ?

अ: हां

ब: नहीं

2. आपको पता है कि क्या करने से सेहत अच्छी रहती है और क्या करने से खराब?

अ: हां

ब: नहीं

3. आप सेहत से जुड़ी जानकारियां जुटाना पसंद करते हैं, लेकिन अच्छी बातों को अपनाने में डरते हैं?

अ: हां

ब: नहीं

4. सेहत से जुड़ी बहस में आप भाग लेते हैं और प्रभावी वक्ता भी साबित होते हैं?

अ: हां

ब: नहीं

5. आपको मेडिकल साइंस की समझ है और बीमारियों के प्रमुख कारणों का भी पता है?

अ: हां

ब: नहीं

6. आप सेहत के बारे में सुनते-समझते सब हैं, लेकिन छोटी-छोटी लापरवाहियों व आलस के कारण परेशान होते रहते हैं?

अ: हां

ब: नहीं

7. सेहत के लिए समय देने या खर्च करने की बात आए तो आप हां तो कहते हैं, लेकिन बाद में पीछे हट जाते हैं?

अ: हां

ब: नहीं

8. आप सेहत से जुड़ी जानकारियों को अखबार या टीवी की बाकी खबरों की तरह लेते हैं?

अ: हां

ब: नहीं

9. आप दूसरों के हालचाल तो बहुत पूछते हैं, लेकिन अपने शरीर की आवाज को दबा जाते हैं ?

अ: हां

ब: नहीं

स्कोर और एनालिसिस

आप जानकर भी अंजान बनते हैं: क्विज के 6 या ज्यादा सवालों पर आपका जवाब 'हां' है, तो आप अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं। अपने नजरिए में बदलाव लाइए और सेहत के प्रति अनुशासित रहिए। छोटे बदलावों से शुरुआत कर, ऐसे लक्ष्य बनाइए जिन्हें आप हासिल कर सकें।

आप जानते भी हैं और मानते भी : क्विज के 6 या ज्यादा सवालों के जवाब में आपने ईमानदारी से 'नहीं' कहा है, तो आप जानकार व समझदार हैं। आप अच्छी तरह जानते हैं कि आपकी ताकत और कमजोरियां क्या हैं । यह आपके संतुलित नजरिए का ही परिणाम है कि सेहत को लेकर हुई कोई लापरवाही भी आप पर ज्यादा असर नहीं करती